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बद्धकोणासन को तितली आसन भी कहा जाता है क्योंकि इसे करते समय पैरों के तलवों एक दूसरे से जुड़े होते है और घुटने ऊपर और नीचे की ओर जाता है जो एक तितली के पाँख फड़-फड़ने से मिलता जुलता हैं।

बद्धकोणासन संस्कृत से लिया गया है, "बद्ध" का अर्थ है - "नियंत्रित किया हुआ", "कोंण" का अर्थ है "कोना", "आसन" का अर्थ है "योग करते समय बैठने की स्थिति" ।

इस आसन का अभ्यास अन्य योग आसनों के साथ सुबह जल्दी कर जाना चाहिए । लेकिन अगर सुबह जल्दी  जागने मे मुश्किल होता है आप इस आसन को शाम को भी कर सकते है ।

बस यह सुनिश्चित करें कि आप अपने भोजन और अपने अभ्यास के बीच कम से कम चार से छह घंटे का अंतर छोड़ दें। इस आसन को करते समय आपका पेट और आंत खाली होनी चाहिए।

बद्धकोणासन कैसे करे

बद्धकोणासन की विधि - Baddha Konasana - Titali Asana
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  • पैर को सीधा कर के बैठ जाये 
  • अपने घुटनों को मोड़ें और अपने पैरों के तलवों को एक साथ लाएं, दोनों तलवों स्पर्श करने चाहिए। 
  • अपनी एड़ी को करीब लाएं जितना कि आप अपने घुटनों में दबाव या दर्द महसूस किए बिना कर सकते हैं। 
  • अपने दोनों हथलियों से पैरों को पकड़े 
  • दो घुटनों को एक साथ ऊपर की ओर ले जाये और नीचे के ओर लाये, यह एक चक्र होगा  
  • 30 या 60 सेकंड तक इसका अभियास करे ।

तितली आसन के फायदे

  • यह आसन गर्भवती महिलाओं के लिए बहुत फायदेमद है।
  • पूरे शरीर में रक्त परिसंचरण में सुधार करने में मदद करता है।
  • यह मूत्राशय और पेट के अंगों के साथ-साथ गुर्दे और प्रोस्टेट ग्रंथि मे सुधार करता है।
  • तनाव से छुटकारा और थकान को कम करता है। 
  • मासिक धर्म की समस्याओं को ठीक करने में सहायत करता है।
  • रोजाना अभियास करने से कमर और कूल्हे क्षेत्र के लचीलेपन में सुधार होता है, जिससे घुटनों, जांघों और कमर शामिल है।
  • यह आसन अस्थमा, बांझपन को ठीक करने में भी मदद करता है।

सावधानियां | Savdhaniya

इस आसन को करते समय कुछ सावधानी का ध्यान रखे ।
  • घुटने की चोट होने पर इस आसन से बचे ।
  • यदि आपको मासिक धर्म हो तो इस आसन का अभ्यास न करें।
  • घुटने की चोट के मामले में इसे न करे 
  • अगर आप हाई ब्लड प्रेशर या हृदय संबंधी किसी समस्या से पीड़ित हैं तो झुकते समय सावधानी बरतें।