"योगासन" संस्कृत शब्द है जिसका अर्थ योग शारीरिक मुद्रा है। पतंजलि ने योग के सिद्धांतों को "योग सूत्र" में लिखा था। उन्होंने केवल ध्यान मुद्रा को "आसन" नाम दिया था और शारीरिक मुद्राओं को उन्होंने "योग व्ययाम" कहा था । हालाँकि, सामान्य गतिशील योग अभ्यासों को आसन के रूप में माना जानने लगा ।

योग का दूसरा "स्तंभ" प्राणायाम है, "प्राण" का अर्थ है "साँस", जीवन शक्ति और "याम" का अर्थ है "नियंत्रित करना" । प्राणायाम मे साँस के प्रति जागरूकता और सांस को नियंत्रण करना शामिल है । प्रत्येक साँस के साथ हम न केवल ऑक्सीजन, बल्कि प्राण को भी अवशोषित करते हैं।

योगासन और प्राणायाम

प्राण ब्रह्मांडीय ऊर्जा है, ब्रह्मांड में वह शक्ति है जो निर्माण और संरक्षण करती है। यह जीवन और चेतना का मूल तत्व है।

मैंने विभिन्न प्रकार के योगासन और प्राणायाम योग के नाम सहित चित्र, लाभ और करने की विधि लिखे है। जिन्हे पढ़कर आप भी सही तरीके से कर सकगे।