पश्चिमोत्तानासन सीधे पैरों पर आगे की ओर मुड़े हुए ऊपरी शरीर के साथ बैठने वाला आसन है। यह हठ योग के 12 मूल आसनों में से एक है और यह अष्टांग श्रृंखला का भी हिस्सा है।

यह "शिव संहिता" में वर्णित आसन में से एक है। पश्चिमोत्तानासन को शरीर में प्राण को संतुलित करने के लिए भी कहा जाता है। 11 वीं शताब्दी के योगी गोरक्षनाथ ने इस आसन को बढ़ावा दिया था ।

पश्चिमोत्तानासन शब्द संस्कृत के मूल शब्दों से बन है "पश्चिम" जिसका अर्थ है "पीछे" या "पश्चिम दिशा" "उटाना", जिसका अर्थ है "तीव्र खिंचाव" और आसन जिसका अर्थ है "बैठने का तरीका"

पश्चिमोत्तानासन कैसे करे | Paschimottanasana Kaise Kare

पश्चिमोत्तानासन करने की विधि, फायदे - Paschimottanasana


  • सबसे पहले दोनों पैरों को बाहर की ओर फैलाते हुए जमीन पर बैठ जाएं।
  • पैर की उंगलियों को आगे और एक साथ रहनी चाहिए।
  • श्वास लें, अपनी बाहों को ऊपर उठाएं और जहां तक संभव हो शरीर को आगे की ओर झुकाने के लिए झुकें।
  • आगे की ओर झुकते समय साँस छोड़े ।
  • अंतिम चरण में, दोनों हाथो को पैरों के तलवे को और नाक को घुटनों को छूना चाहिए।
  • प्रारंभ में, इसे 5 सेकंड के लिए करें और धीरे-धीरे जब तक आप सहज महसूस करते हैं, तब तक मुद्रा मे बने रहने की कोशिश करें।
  • श्वास लें और मूल स्थिति में आएं।
  • यह एक दौर है। शुरू में, दो बार करें।

पश्चिमोत्तानासन के लाभ | Paschimottanasana Ke Labh

  • यह आसन मन को शांत करता है और तनाव से भी छुटकारा दिलाता है ।
  • इसे करने से कंधे, रीढ़ को अच्छा खिंचाव मिलता है ।
  • इस आसन का नियमित रूप से अभ्यास करने से पाचन में सुधार होता है ।
  • चिंता, सिरदर्द और थकान कम करने मे सहायता मिलती है ।
  • इस आसन से उच्च रक्तचाप, अनिद्रा, बांझपन और साइनसाइटिस को ठीक किया जा सकता है ।
  • भूख बढ़ाने और मोटापा कम ( विशेष कर पेट की चर्बी) करने के लिए फ़ायदेमद है ।

सावधानियां | Savdhaniya

आपको इस आसन को करने से पहले कुछ बताओ को ध्यान में रखना चाहिए ।
  • अस्थमा या दस्त होने पर इस आसन से बचें ।
  • यदि आपको पीठ में चोट लगी है, तो आपको एक प्रमाणित योग प्रशिक्षक के मार्गदर्शन में ही इस आसन का अभ्यास करना चाहिए ।
  • गर्भवती महिलाओं को इस न करे ।

0 टिप्पणियाँ