हलासन एक हठ योगासन है आमतौर पर इसे सर्वंगासन के बाद 1 से 5 मिनट बाद किया जाता है । इस मुद्रा में शरीर का आकार किसान के द्वारा उपयोग होने वाले उपकरण "हल" जैसा होता है जिस कारण इसका नाम हलासन है ।

हमारा मस्तिष्क सुषुम्ना नाड़ी द्वारा सारे शरीर पर नियंत्रण करता है। सुषुम्ना नाड़ी सिर के पिछले भाग में स्थित लघु मस्तिष्क में से निकलकर मेरुदंड के साथ-साथ मूलाधार चक्र तक जाती है। इस आसन से सबसे अधिक प्रभाव स्नायु मंडल तथा इसके स्रोत पर पड़ता है, जिससे शरीर के भीतरी तथा बाहर के भागों पर भलीप्रकार नियंत्रण प्राप्त करने में मदद मिलती है। मानसिक शक्ति का विकास होता है। सारे चक्र प्रभावित होते हैं । जितना धीरे-धीरे इस आसन को करेंगे और पूर्ण स्थिति में अधिक रुकेंगे, उतना अधिक लाभ होगा।

हलासन के लाभ | Halasana ke Labh

  • इस आसन से सभी पाचन अंगों व रीढ़ के एक-एक मोहरे का व्यायाम होता है, उनमें लचक आती है, वे पुष्ट होते हैं।
  • इससे गले की ग्रंथियां प्रभावित होती हैं।
  • नाड़ी संस्थान सतेज व स्वस्थ होता है।
  • शरीर संतुलन में आता है।
  • पेट व कमर की चर्बी कम होती है।
  • रक्त का संचार तेज होता है।
  • भूख बढ़ती है और सुषुम्ना नाड़ी प्रभावित होती है।
  • मानसिक व शारीरिक स्वास्थ्य के लिए हलासन सर्वोत्तम है।

हलासन के फायदे - Halasana Ke fayde

हलासन की विधि | Halasana ki Vidhi

पीठ के बल चित्त लेट जाएं, सारे शरीर को तान लें, हथेलियां जमीन पर और शरीर के साथ सटी हईं।अब हाथों पर दबाव डालते हुए अपनी टांगों को धीरे-धीरे श्वास भरते हुए ऊपर उठाएं। यह ध्यान रहे कि सिर न उठे, पांव बाहर की ओर खिंचे रहें। इस आसन में जितना धीरे-धीरे अपनी टांगों को उठाएंगे उतना अधिक लाभ मिलेगा। अब श्वास छोडते हए हाथों पर जोर देते हुए कमर को ऊपर उठा दें और पावा को सिर के ऊपर से पीछे ले जाकर जमीन पर लगा दें।पांवों को आगे-से-आगे ले जान का प्रयास करें।आधा मिनट या एक मिनट आसन में रुकें। अब धीरे-धीरे रीढ के एक-एक मोहरे को जमीन पर, पांवों को पीछे की ओर तानते हुए, टेकते जाएं। फिर पांवों को जमीन पर लाएं।

वापिस आते हुए भी सिर को उठाना नहीं है। किसी प्रकार का झटका नहीं आना चाहिए। आते हुए शरीर को शिथिल कर विश्राम करें। जिन्हें अभ्यास नहीं हो। वे केवल कमर तक उठाएं और वापिस जमीन पर आ जाएं। इसे प्रतिदिन दो-तीन बार करें। फिर कमर को ऊपर उठाने का अभ्यास करें। इस प्रकार धीरे-धीरे यह आसन होने लगेगा। ध्यान विशुद्धि-चक्र पर।

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