-->

योग में बंध, जिसमें शरीर के एक हिस्से को किसी तरह से संकुचित किया जाता है। सबसे शक्तिशाली बंधो में से एक है उड्डियान बंध है। उड्डियान बंध का अभ्यास सांस लेकर, पेट को अंदर की ओर खींचकर और सांस को बाहर रोककर किया जाता है। उड्डीयान का अर्थ ऊपर की ओर और बंध का अर्थ बंधन से है। उड्डियान बंध का अभ्यास खाली पेट करें, और केवल साँस छोड़ने के बाद, साँस लेने से पहले कभी नहीं करें। जिस समय आप बंध धारण करते हैं, उस समय जालंधर बंध भी करें। 

उड्डीयान बंध के फायदे | uddiyana bandha in hindi
credit : https://commons.wikimedia.org/wiki/File:28_Uddiyana-bandha.jpg


उड्डियान बंध की विधि

  • पैरों पर खड़े हो जाएं और हाथों को घुटनों पर टिकाएं।
  • घुटनों और सिर को थोड़ा मोड़ें।
  • पूरी ताकत से सांस छोड़ें। ध्यान दें कि अपनी छाती और पेट दोनों से दबाते हुए करना हैं।
  • अपनी सांस रोककर रखें और अपने फेफड़ों में कोई हवा न जाने दें।
  • नाक से सांस लें और जोर से सांस छोड़ें। फेफड़ों से हवा को बाहर निकालने के लिए एब्स को कस लें।
  • अपने पेट पर ध्यान केंद्रित करें और पेट को ऊपर उठता हुए महसूस करें।
  • 5 से 15 सेकंड के लिए रुकें। एब्डोमिनल को छोड़ें, ठुड्डी को ऊपर उठाएं और सामान्य रूप से सांस लें।
  • कम से कम 3 और राउंड करें। प्रत्येक राउंड के बाद आराम करें।

उड्डियान बंध के लाभ

  • यह पेट की मांसपेशियों और डायाफ्राम को मजबूत करता है।
  • इसे करने से फेफड़ों की क्षमता में वृद्धि होती है।
  • तंत्रिका तंत्र के बीच समन्वय में सुधार करता है।
  • इसका अभ्यास से पेट की मांसपेशियों की मालिश होती है।
  • पाचन में सुधार होता है।
  • मस्तिष्क में रक्त के प्रवाह को उत्तेजित करता है।

एहतियात

  • पेट या आंतों के अल्सर से पीड़ित होने पर इसे न करे।
  • हर्निया के रोगियों को नहीं करना चाहिए।
  • उच्च रक्तचाप और हृदय रोग से पीड़ित होने पर न करे।
  • ग्लूकोमा से पीड़ित व्यक्ति को इसका अभ्यास नहीं करना चाहिए।
  • गर्भावस्था और मासिक धर्म के दौरान इसे न करना चाहिए।