प्राणायाम की परिभाषा | Pranayama Ki Paribhasha


प्राणायाम एक संस्कृत शब्द है जिसे वैकल्पिक रूप से "प्राण का विस्तार"(साँस पर नियंत्रण या जीवन शक्ति) के रूप में अनुवादित किया जाता है। यह शब्द दो संस्कृत शब्दों से बना है: प्राण का अर्थ है साँस या जीवन शक्ति और याम का अर्थ है (प्राण को नियंत्रित करना ) । 

प्राणायाम योग का एक अभिन्न अंग है। प्राणायाम से ऊर्जा को नियंत्रित किया जा सकता है और स्वस्थ शरीर को प्राप्त किया जा सकता है। पतंजलि ने अपने योग सूत्र के पाठ में प्राणायाम को जागरूकता की उच्च अवस्था को प्राप्त करने के साधन के रूप में उल्लेख किया है।

प्राणायाम योग - Pranayama Yoga

प्राणायाम के प्रकार | Pranayam Ke Prakar


प्राणायाम मुख्य रूप से तीन चरणों में विभाजित है ।
  • पूरक(साँस लेना)
  • कुम्भक (साँस रोकना )
  • रेचक (साँस छोड़ना )

प्राणायाम के प्रमुख प्रकार

  • भस्त्रिका प्राणायाम
  • बाह्य प्राणायाम
  • भ्रामरी प्राणायाम
  • उद्गीथ प्राणायाम
  • प्रणव प्राणायाम
  • सीत्कारी प्राणायाम
  • शीतली प्राणायाम
  • उज्जायी प्राणायाम
  • चंदभेदी प्राणायाम
  • सूय॔भेदी प्राणायाम
  • अनुलोम-विलोम प्राणायाम
  • अग्नि प्रदीप्त प्राणायाम
  • अग्नि प्रसारण प्राणायाम
  • एकांड स्तम्भ प्राणायाम
  • सर्वद्वारबद्व प्राणायाम
  • सर्वांग स्तम्भ प्राणायाम
  • सम्त व्याहृति प्राणायाम
  • चतुर्मुखी प्राणायाम,
  • प्रच्छर्दन प्राणायाम
  • चन्द्रभेदन प्राणायाम
  • यन्त्रगमन प्राणायाम
  • वामरेचन प्राणायाम
  • दक्षिणरेचन प्राणायाम
  • शक्तिप्रयोग प्राणायाम
  • त्रिबन्धरेचक प्राणायाम
  • कपालभाति प्राणायाम
  • हृदयस्तम्भ प्राणायाम
  • मध्यरेचन प्राणायाम
  • त्रिबन्धकुम्भक प्राणायाम
  • ऊर्ध्वमुखभस्त्रिका प्राणायाम
  • मुखपूरककुम्भक प्राणायाम
  • वायुवीयकुम्भक प्राणायाम
  • वक्षस्थलरेचन प्राणायाम
  • दीर्घश्वास-प्रश्वास प्राणायाम
  • प्राह्याभ्न्वर कुम्भक प्राणायाम
  • षन्मुखीरेचन प्राणायाम
  • कण्ठवातउदा पूरक प्राणायाम
  • सुखप्रसारण पूरक कुम्भक प्राणायाम
  • नाड़ीशोधन प्राणायाम व नाड़ी अवरोध प्राणायाम

प्राणायाम कैसे करें | Pranayama Kaise Kare

प्राणायाम योग आसन के अभ्यास के बाद किया जाना चाहिए। प्राणायाम में श्वास केवल नाक के माध्यम से ली जाना चाहिए सिवाय शीतलता और शीतकारी प्राणायाम में। प्राणायाम के दौरान, आँखें बंद करे, गहरी सांस अंदर ले इसे समय कुछ न सोचे । जितना सभव हो सके सांस को रोके और धीरे धीरे सांस बहार निकले ।

इसके तीन चरण हैं जिन्हीं आप प्राणायाम क्रम भी कह सकते है ।

धीमी गति से श्वास लें (जितना संभव हो उतना गहरी), बहुत धीरे-धीरे और लगातार। यह सोचना चाहिए कि आप आप ऊर्जा को अपने शरीर में ले रहे हैं।

साँस को तब तक रोके रखें जब तक आरामदायक हो। इस समय के दौरान, सोचें कि प्राण (ऊर्जावान सांस) मस्तिष्क से लेकर पैर तक पूरे शरीर को साफ कर रही है।

साँस छोड़ने की अवधि साँस लेने की अवधि से अधिक होनी चाहिए। साँस छोड़ते समय, सोचें कि आपके शरीर और दिमाग की सभी अशुद्धियाँ जो साफ़ हो गई थीं, अब शरीर से बाहर निकल गयी है ।

अपनी सुविधा के आधार पर तीन से दस बार के लिए चरणों को दोहराएं। प्राणायाम के बाद, आपको कम से कम पांच मिनट के लिए एक ही जगह पर बैठने चाहिए।

प्राणायाम के नियम | Pranayama Ke Niyam

प्राणायाम शुरू करने से पहले सूर्य नमस्कार, कोई गतिशील व्यायाम या योग आसन करे इसे फेफड़ों फुलते और सिकोड़ते है । 

खाली पेट या चाय, कॉफी के 15 मिनट बाद प्राणायाम करे। 

प्राणायाम का समय - सुबह सही समय है प्राणायाम करने का, इसे ताजी हवा और ऊर्जा दिमाग और शरीर मे भर जाता है।

प्राणायाम स्थान - पर्याप्त हवा, प्रकाश के साथ स्थान शोर मुक्त और विशाल होना चाहिए। यदि एक बंद कमरे में करे, तो खिड़कियों को खुला रखे ।

प्राणायाम आसन - फर्श पर एक चटाई पर बैठें, रीढ़ (पीठ) को सीधा और सामने की तरफ देखे  । घुटने की समस्या वाले लोगों के लिए और जो फर्श पर नहीं बैठ सकते वहे एक कुर्सी का उपयोग करे ।

प्राणायाम के लाभ | Pranayama Ke Fayde

  • प्राणायाम तनाव संबंधी विकार के इलाज में फायदेमंद है।
  • यह अस्थमा के लक्षणों से राहत दिलाने में मदद करता है।
  • प्रतिदिन प्राणायाम का अभ्यास करने से स्थिर दिमाग और दृढ़ इच्छा शक्ति में सहायता करता है।
  • कुछ प्राणायाम वजन घटाने के लिए उत्कृष्ट है।

प्राणायाम में सावधानियां | Pranayam Karte Samay Savdhaniya

  • यह गर्भवती महिला या 12 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए उपयुक्त नहीं है।
  • अस्थमा, पुरानी खांसी जैसी श्वसन समस्याओं वाले लोगों इसे न करे।
  • गंभीर बीमारियों वाले लोगों के लिए उपयुक्त नहीं है जैसे कि हृदय की स्थिति, कैंसर आदि।

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